Saturday, July 4, 2020
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OSI Model in Hindi – ओएसआई मॉडल क्या है जाने हिंदी में

इस आर्टिकल में हम आपको पूरा OSI Model in Hindi में समझायेंगे। OSI Model क्या होता है , उसकी सातो लेयर्स यानी की परतों की जानकारी तथा उसकी विशेषताएं और कमिया भीं बताएंगे।

अनुक्रम

What is OSI Model in Hindi – ओएसआई मॉडल क्या है?

OSI Model का नाम Open Systems Interconnection (ओपेन सिस्टम्स इंटरकनेक्शन्स) होता है

इस मॉडल का उपयोग ख़ास रूप से इस्तेमाल किसी network पर स्थित दो यूज़र्स के बीच कनेक्शन स्थापित के माध्यम के रूप में होता है।

OSI Model के तहत 7 layers आती हैं। OSI Model की हर एक लेयर / परत अपने अलग-अलग काम करती है।

ओएसआई Model में हर लेयर के बीच डाटा यानी की जानकारी का आदान प्रदान होता है

ओएसआई Model किसी भी नेटवर्क में डाटा का आदान प्रदान करने के तरीके का वर्णन करता अत: सेंड / रिसीव (send / receive )

OSI Model का full form क्या होता है – ओएसआई मॉडल का फुल फॉर्म in hindi

OSI Model का full form – Open Systems Interconnection (ओपेन सिस्टम्स इंटरकनेक्शन्स) होता है

OSI Model का विकास किसने और कब किया?

OSI Model को ISO ने विकसित किया था। ISO यानी की International Organization for Standardization ने 1978 में OSI Model को बनाया था।

7 layers of OSI Model in Hindi / ओएसआई मॉडल की सातों लेयर्स

OSI Model की 7 layers होतीं हैं जो की नीचे विस्तार से समझायीं गयीं हैं :

  • Layer 1 – Physical Layer
  • Layer 2 – Data Link Layer
  • Layer 3 – Network Layer
  • Layer 4 – Transport Layer
  • Layer 5 – Session Layer
  • Layer 6 – Presentation Layer
  • Layer 7 – Application Layer
OSI Model in hindi

फिज़िकल लेयर (Physical Layer)

OSI model की सबसे निम्नतम लेयर (Lowest Layer) Physical लेयर होती है।

Physical Layer बिट यूनिट भी कहलाता है।

जैसा की इसके नाम से पता चलता है ये परत फिजिकल एवं इलेक्ट्रिकल कनेक्शंस के लिए जिम्मेदार होता है जैसे की :- डेटा रेट्स , वोल्टेज इत्यादि ।

जब इस लेयर में डाटा आता है तो यहाँ पर जो डिजिटल सिग्नल (Digital Signal ) होता है वो इलेक्ट्रिकल सिग्नल (Electrical Signal) में परिवर्तित हो जाता है।

Physical Layer में इसके अतिरिक्त network topology का भी कार्य होता है। Network Topology का मतलब in Hindi नेटवर्क सांस्थितिकी होता है।

किसी भी नेटवर्क का Wireless या Wired होना भी फिजिकल लेयर में तय होता है।

Functions of Physical Layer / फिज़िकल लेयर के कार्य

  • Physical Layer का मुख्य कार्य किन्ही भी दो डिवाईसेस अथवा यूज़र्स के बीच physical connection स्थापित करना होता है।
  • कनेक्शन स्थापित करने के साथ साथ ये यह भी तय करता है की कौन सा Transmission Mode दोनों devices के बीच use होगा।
  • Transmission Mode तीन type का होता है – Simplex, Half-duplex, Full duplex

डाटा लिंक लेयर (Data Link Layer)

OSI MODEL की दूसरी नंबर की लेयर Data Link Layer होती है।

Data Link Layer को frame unit (फ्रेम यूनिट) भी कहा जाता है।

इस लेयर अथवा परत की दो Sub-Layers होतीं है , जो हैं :

  • Media Access Control (MAC)
  • Logic Link Control (LLC)

Data Link Layer में Network Layer द्वारा भेजें गए डाटा को डिकोड एंड एनकोड किया जाता है। साथ ही में ये इन डाटा की त्रुटियों को भी जांचता है।

डाटा ट्रांसमिशन (Data Transmission) के लिए इस लेयर में दो protocols का use करते हैं :

  • HDLC (High-level data link control)
  • PPP (Point-to-Point Protocol)

Functions of Data Link Layer / डाटा लिंक लेयर के कार्य

  • Data Link Layer का मुख्य कार्य फिजिकल रॉ बिट स्ट्रीम physical raw bit stream को packets में परिवर्तित करना होता है।
  • यह Packets OSI Model में Frames कहलाते हैं।
  • डाटा लिंक लेयर इन्ही frames में header एंड trailer को add करने का काम करती है।
  • Data Link Layer का कार्य data rate को maintain करना भी होता है। ये डाटा रेट को मेन्टेन करके data का flow control भी करता है।
  • कोई भी जानकारी में त्रुटि न हो इसकी जिम्मेदारी भी ये लेयर लेता है।
  • यह हर frame में trailer के साथ साथ एक चक्रीय जांच (Cyclic Redundancy Check) यानी की CRC भी add करता है। यह इस बात का ध्यान रखता है की डाटा में कोई भी खराबी न आये।
  • साथ ही , जब कभी ऐसी परिस्थिति आये की दो devices एक ही communication channel से जुड़ीं हों तो ये ही फैसला लेता है की कौन सी device को channel यूज़ करने दिए जाएगा।

नेटवर्क लेयर (Network Layer)

OSI Model में तीसरी लेयर Network layer होती है।

इस layer का दूसरा नाम Packet Unit (पैकेट यूनिट) भी होता है।

Network Layer में data packets होते हैं ये लेयर इन पैकेट्स को source से destination तक पहुँचाता है। इस लेयर में switch एंड route तकनीक का उपयोग किया जाता है।

Functions of Network Layer / नेटवर्क लेयर के कार्य

  • Network Layer का मुख्य कार्य Inter Networking का होता है।
  • नेटवर्क लेयर devices में logical connection भी उपलब्ध कराती है।
  • जो frame इसे प्राप्त होता है , Network Layer उस फ्रेम के header में source एवं destination को add करती है।
  • इसी source एंड destination का use करके address को पहचाना जाता है।
  • साथ ही यह लेयर Routing का भी कार्य संभालती है मतलब ये है की ये सबसे अच्छा तथा काम खर्चे वाला मार्ग भी निर्धारित करती है।

ट्रांसपोर्ट लेयर (Transport Layer)

OSI Model की चौथी (fourth) लेयर Transport Layer होती है।

इस layer को Segment Unit (सेगमेंट यूनिट) के नाम से भी जाना जाता है।

ट्रांसपोर्ट लेयर का कार्य दो computers के बीच communication की व्यवस्था करना भी है।

Functions of Transport Layer / ट्रांसपोर्ट लेयर के कार्य

  • Transport Layer का प्रमुख कार्य डाटा को एक device से दुसरे device में transfer करने का होता है।
  • ट्रांसपोर्ट लेयर साथ ही में प्राप्त हुए messages यानी डाटा को बहुत सारे segments अथवा खंडो में विभाजित कर देती है।
  • साथ ही हर एक segment के साथ एक sequence Number जोड़ दिया जाता है जो की unique / अद्वितीय होता है।
  • Transport Layer दो सर्विसेज प्रदान करती है – Connection Oriented and Connection Less .
  • साथ ही ये दो प्रकार के कार्य करती है – Flow Control तथा Error Control (फ्लो कण्ट्रोल एंड एरर कण्ट्रोल )

सेशन लेयर (Session Layer)

OSI Model की पांचवी लेयर यानी Fifth लेयर Session Layer होती है।

इसका प्रमुख कार्य computers के बीच कनेक्शन को नियंत्रित अतः कण्ट्रोल करना होता है।

जैसा इसके नाम से पता चलता है OSI Model की सेशन लेयर दो devices के बीच session उपलब्ध कराता है। Session को in Hindi अधिवेशन कहा जाता है।

Session लेयर के द्वारा ही एक computer तथा वेबसाइट के बीच सेशन स्थापित हो पता है।

सेशन Layer मुख्यतः तीन कार्य संभालती है :

  1. कनेक्शन Establish करना अर्थात बनाना
  2. उसे Maintain करना यानी बनाये रखना
  3. तथा Terminate करना यानी ख़तम करना

Functions of Session Layer / सेशन लेयर के कार्य

  • OSI Model की सेशन लेयर एक संवाद नियंत्रक की तरह काम करती है।
  • यह Layer किन्ही दो प्रोसेसेज के बीच डायलॉग create करती है।
  • यदि डाटा के आदान प्रदान में कोई त्रुटि आ जाती है तो यह दुबारा से डाटा भेजती है यानी की Synchronization का कार्य करती है।

प्रेजेंटेशन लेयर (Presentation Layer)

OSI Model की छंटवी लेयर Presentation Layer होती है।

प्रेजेंटेशन लेयर का उपयोग डाटा के encryption ,decryption तथा compression के लिए होता है।

ध्यान दे : Encryption एक तकनीक होती है जो डाटा को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल की जाती है। Encryption से डाटा किसी Key का इस्तेमाल करके बदल दिया जाता है और जो Key जानता है वो ही उसे वापस से सही रूप में ला सकता है. डाटा को वापस रूप में लाने को Decryption कहते हैं।

Functions of Presentation Layer / प्रेजेंटेशन लेयर के कार्य

  • Presentation Layer का मुख्य तीन कार्य होते है –
    • Data Encryption
    • Data Decryption
    • Data Compression
  • डाटा कम्प्रेशन का मतलब डाटा का size काम करना होता है।

एप्लीकेशन लेयर (Application Layer)

OSI model की सातवीं लेयर Application Layer होती है। यह OSI Model की सबसे ऊपर की लेयर होती है।

ओएसआई मॉडल की एप्लीकेशन लेयर प्रमुखतः एप्लीकेशन तथा अन्य लेयर्स के बीच इंटरफ़ेस स्थापित करती है।

यह सबसे उच्त्तम लेयर होती है इसलिए ये एन्ड यूजर के सबसे नज़दीक होती है।

इस layer के अंतर्गत कई तरह के प्रोटोकॉल्स आते है – जैसे की : HTTP Protocol , SMTP , FTP , NFS आदि।

Functions of Application Layer / एप्लीकेशन लेयर के कार्य

  • Application Layer का use करके यूजर files को एक्सेस कर सकता है तथा साथ ही retrieve भी कर सकता है।
  • यह layer Email को Store तथा Forward भी करता है।
  • इस लेयर का यूज़ करके हम directory को access भी कर सकते हैं.

ओएसआई मॉडल के लाभ / Advantages of OSI Model in Hindi

OSI Model के निम्नलिखित लाभ / Advantages हैं :

  • OSI मॉडल की एक लेयर का दुष्प्रभाव दुसरे पर नहीं पड़ता।
  • यह मॉडल बहुत ही फ्लेक्सिबल होता है अतः इसमें कोई भी तरीके का प्रोटोकॉल डाला जा सकता है।
  • यह दोनों टाइप ही सर्विसेज प्रदान करता है चाहे वो Connection Oriented हो या Connection Less .
  • ओएसआई मॉडल बहुत ही Secured Model है।

ओएसआई मॉडल की हानियां / Disadvantages of OSI Model in Hindi

OSI Model के निम्नलिखित हानिया / Disadvantages हैं :

  • OSI Model की हर layer interdependent होती है।
  • ओएसआई मॉडल किसी एक प्रोटोकॉल को विशेष रूप से निर्धारित नहीं करता।
  • यह मॉडल में सर्विसेज का डुप्लीकेशन हो जाता है जैसे की त्रुटि कण्ट्रोल करना दो layers की सर्विस है डाटा लिंक लेयर तथा ट्रांसपोर्ट।

OSI Model की layers को आसानी से याद कैसे करें Hindi में?

Physical Layer – प्यारे
Data Link Layer – दोस्त
Network Layer – नीरज
Transport Layer – तुम्हारी
Session Layer – शादी
Presentation Layer – पर
Application Layer – आऊंगा

सारांश

OSI Model का पूरा नाम Open Systems InterConnection होता है इसका इस्तेमाल नेटवर्क में यूज़र्स के बीच कनेक्शंस तथा डाटा आदान प्रदान के लिए किया जाता है।

इसकी 7 Layers होती है। जिनका सारांश नीचे आसान भाषा में दिया गया है :

Layer NameMain TaskLayer Number
Physical Layerडिजिटल सिग्नल (Digital Signal ) को इलेक्ट्रिकल सिग्नल (Electrical Signal) में परिवर्तित करना।Layer 1 – पहली
Data Link Layerडाटा को डिकोड एंड एनकोड करना।Layer 2 – दूसरी
Network LayerNetwork Layer में data packets होते हैं ये लेयर इन पैकेट्स को source से destination तक पहुँचाता है।Layer 3 – तीसरी
Transport LayerTransport Layer का प्रमुख कार्य डाटा को एक device से दुसरे device में transfer करने का होता है।
Layer 4 – चौथी
Session LayerOSI Model की सेशन लेयर दो devices के बीच session उपलब्ध कराता है।Layer 5 – पांचवी
Presentation Layerप्रेजेंटेशन लेयर का उपयोग डाटा के encryption ,decryption तथा compression के लिए होता है।
Layer 6 – छठी
Application LayerApplication Layer का use करके यूजर files को एक्सेस कर सकता है तथा साथ ही retrieve भी कर सकता है।
Layer 7 – सातवीं

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